
धर्म विजय की ज्योति जलाएँ, राम मर्यादा मन में लाएँ।
दुर्गा शक्ति साहस दे माँ, दुर्बल जन की रक्षा कर माँ।
ज्ञान बने धनुष, सत्य हो बाण, सेवा बने हमारा मान।
जय विजयादशमी मंगलकारी, दूर हो भीतर की अँधियारी॥

धर्म विजय की ज्योति जलाएँ, राम मर्यादा मन में लाएँ।
दुर्गा शक्ति साहस दे माँ, दुर्बल जन की रक्षा कर माँ।
ज्ञान बने धनुष, सत्य हो बाण, सेवा बने हमारा मान।
जय विजयादशमी मंगलकारी, दूर हो भीतर की अँधियारी॥